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'जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा तब तक आरक्षण की जरूरत', बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

 Reported By: Rajesh Kumar Written By: Vinay Trivedi
 Published : Aug 06, 2026 07:10 pm IST,  Updated : Aug 06, 2026 07:51 pm IST

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने देश में लागू आरक्षण की व्यवस्था पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा तब तक आरक्षण की जरूरत पड़ेगी।

संघ प्रमुख मोहन भागवत...- India TV Hindi
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण पर बड़ा बयान दिया। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज (गुरुवार को) आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत ने मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित I.I.M.U.N. कार्यक्रम में कहा कि जब तक सामाजिक भेदभाव है तब तक आरक्षण चलेगा। आरक्षण सामाजिक एकता के लिए लाया गया। आरक्षण पर अंबेडकर की सलाह मानी जानी जाए। जानें आरक्षण को लेकर मोहन भागवत ने क्या-क्या कहा।

सामाजिक भेदभाव रहने तक आरक्षण की जरूरत

डॉ. मोहन भागवत ने कहा, 'आरक्षण के विषय को समझने के लिए सबसे पहले डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को ईमानदारी से पढ़ना और अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक भेदभाव के कारण दिया गया है और जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।'

एक समय आएगा जब इसकी जरूरत नहीं रह जाएगी

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आरक्षण कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, बल्कि सामाजिक उत्थान का एक माध्यम है।

यदि आरक्षण ईमानदारी से लागू किया जाए और राजनीति से दूर रखा जाए, तो एक समय ऐसा आएगा जब इसकी आवश्यकता स्वयं समाप्त हो जाएगी: डॉ. मोहन भागवत

आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक एकता स्थापित करना था

डॉ. मोहन भागवत ने यह भी कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक एकता स्थापित करना था, लेकिन दुर्भाग्य से राजनीति के कारण इसका उपयोग कई बार समाज में विभाजन पैदा करने के लिए किया गया। उनके अनुसार, यदि इस विषय पर राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर निष्पक्षता से काम किया जाए, तो सामाजिक समरसता का लक्ष्य अधिक तेजी से हासिल किया जा सकता है।

जिन्हें आरक्षण का लाभ मिला वे दूसरों को मौका देने की भावना रखें

मोहन भागवत ने कहा कि जिन लोगों का आरक्षण के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक उत्थान हो चुका है, उन्हें आगे बढ़कर दूसरों को भी अवसर देने की भावना रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण पाने वाले समाज के भीतर भी अब ऐसी आवाजें उठने लगी हैं कि जिनको लाभ हो चुका है, उनके बाद वंचित लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसी सोच के कारण कुछ राज्यों में वर्गीकरण की मांग भी उठी है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की है।

पहले भी आरक्षण का समर्थन कर चुके हैं संघ प्रमुख

संघ प्रमुख मोहन भागवत पहले भी आरक्षण को लेकर अपना बयान दे चुके हैं। एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था कि आरएसएस ने हमेशा आरक्षण की व्यवस्था का सपोर्ट किया है। आरक्षण कोई समस्या नहीं है, बल्कि आरक्षण की राजनीति समस्या है। भागवत ने कहा, 'सामाजिक कलंक को मिटाने के लिए दिए जा रहे आरक्षण का संघ पूरी तरह समर्थन करता है। आरक्षण कब तक दिया जाए, यह फैसला वही लोग करें, जिनके लिए रिजर्वेशन की व्यवस्था की गई है। जब उन्हें लगे कि यह आवश्यक नहीं है, तो वे इसको लेकर फैसला लें।'

देश में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था

देश में केंद्र की सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की बात करें तो वर्तमान समय में यह लगभग 59.5 प्रतिशत है। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के लिए 27 फीसदी, अनुसूचित जाति यानी SC के लिए 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति यानी ST के लिए 7.5 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण शामिल है। बाकी अलग-अलग राज्यों की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अन्य तरह के आरक्षण भी हैं।

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